हाय हाय करोना, हाय हाय करोना -- मेरी नयी कविता का आनंद उठाएं
हाय हाय करोना, हाय हाय करोना डॉ पुनीत अग्रवाल मेरी नयी कविता का आनंद उठाएं २८-६-२०२१ चमकता हुआ हो सूरज , या रात का चांदना एक ही काम बचा बस ,नाम तुम्हारा जपना सुबह सुबह जम्हाई, दिन रात उबासी लेना हाय हाय करोना, हाय हाय करोना। १। भूले खाना-पीना, भूले जोरों से हंसना मौत को आमंत्रण देने जैसा , लगे खाँसना आओ मिलकर, लगाएं जोरों का धक्का गो बैक करोना, यू गो बैक करोना.२। लेटे-लेटे बिस्तर में, सिर्फ देखना टीवी मिला वर्षों बाद, आनंद पुराना वही देख देख कर भैया , थक गए अब तो भागो दूर करोना, तुम भागो दूर करोना।३। आबाद हो गए, सूनी छत और आंगन देती नयी फुलवारी, नित्य आनंद सुहाना गुड़ाई कर कर, हाथ छिल गए अब यू सिली कोरोना, यू पागल ...